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Showing posts from September, 2020

तीन दोनों कि कहानी... Funny🤣😝🤣By:-- sonu sargam

  तीन दोस्त एक ऊंची ईमारत की सौवीं मंजिल पर रहते थे। एक दिन बेचारे काम से घर लौटे तो लिफ्ट काम नहीं कर रही थी। दोस्तों ने सीढ़ियों से ऊपर जाने का फैसला किया पहली 50 मंजिलों तक एक दोस्त ने एक्शन फिल्म की स्टोरी सुनाई और समय कट गया। इसके बाद 99वीं मंजिल तक दूसरे दोस्त ने एक रोमांटिक फिल्म की स्टोरी सुनाई... लेकिन 100वीं मंजिल पर फ्लैट के बाहर छोड़कर तीसरे दोस्त ने सिर्फ एक लाइन सुनाई कि तीनों की आंख में आंसू आ गए... उसने कहा....मै चाबी कार में ही छोड़ आया हूं। hahah hahaha🤣🤣😂🤣😂🤣😂 😜🤣😀😀🤦‍♂️🤦‍♂️🤣😜🤣😜😃😀🤣🤣🤣🤣🤣 By :- SONU SARGAM

✈ *ज़िन्दगी परदेस की*✈ By:- SONU SARGAM

 गल्फ याने परदेस की ज़िन्दगी के बारे  में बहुत ही खूबसूरत तरीके से लिखा हैं मैंने           ✈ *ज़िन्दगी परदेस की*✈ ज़िंदगी परदेस कि अजीब है यारो पैसे होते हुये भी मै यहाँ गरीब हु यारो, ये वो मंज़िल है जो बस दूर से अच्छी लगती है कुछ को भा गयी कुछ बड़े बदनसीब है यारो.. पैसे की चाह में निकल तो आया था साथ में सबके सपने बस माँ की दुआए लाया था.. यहा कोई किसीका नही होता ये पता चल गया ज़रूरत के वक़्त हर कोई बदल गया.. सुन यार मेरे यहाँ कोई नहीं किसीका उलझने हजारो है आलम है बेबसी का.. न पेड़ है पैसो का न मेरी सोने की खान है उंचाईओ पे काम करते है हथेली पे जान है.. न बिवी की रोटी है ना माँ की दाल है जेब में पैसे होके भी मुसाफिरों सा हाल है.. न प्यास का अहसास है न खाने की भूक है ज़िन्दगी सोने का ताला है पर एक खाली संदूक है.. एक दौर ऐसा भी आया जब मै बोहोत बीमार था बुखार से मर रहा था पर मजबूरि से लाचार था.. जाना पड़ा था काम पे दिल में सवाल था आँखों में थे आंसू पर घर का खयाल था.. आधे से ज्यादा ज़िंदगी कमाने मे निकल गयी अपनो कि ज़िंदगी बहेतर बनाने मे निकल गयी.. वो कर रहे है ख्वाहि...

Friend Emotional Story by:- SONU SARGAM

 Friend Emotional Story by:- SONU SARGAM--दो बचपन के दोस्तों का सपना बड़े होकर सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना था. दोनों ने अपना यह सपना पूरा किया और सेना में भर्ती हो गये. S. K   बहुत जल्द उन्हें देश सेवा का अवसर भी प्राप्त हो गया. जंग छिड़ गई और उन्हें जंग में भेज दिया गया. वहाँ जाकर दोनों ने बहादुरी से दुश्मनों का सामना किया. जंग के दौरान एक दोस्त बुरी तरह घायल हो गया. जब दूसरे दोस्त को यह बात पता चली, तो वह अपने घायल दोस्त को बचाने भागा. तब उसके कैप्टन ने उसे रोकते हुए कहा, “अब वहाँ जाने का कोई मतलब नहीं. तुम जब तक वहाँ पहुँचोगे, तुम्हारा दोस्त मर चुका होगा.”   लेकिन वह नहीं माना और अपने घायल दोस्त को लेने चला गया. जब वह वापस आया, तो उसके कंधे पर उसका दोस्त था. लेकिन वह मर चुका था. यह देख कैप्टन बोला, “मैंने तुमसे कहा था ना कि वहाँ जाने का कोई मतलब नहीं. तुम अपने दोस्त को सही-सलामत नहीं ला पाए. तुम्हारा जाना बेकार रहा.” सैनिक ने उत्तर दिया, “नहीं सर, मेरा वहाँ उसे लेने जाना बेकार नहीं रहा. जब मैं उसके पास पहुँचा, तो मेरी आँखों में देख मुस्कुराते हुए उसने कहा था – द...